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"हर कदम पर भावनाएं हमारे जीवन की चालें चलती हैं — हम सिर्फ मोहरे बनते हैं।"
"भावनाओं की रासलीला" एक अनोखा संग्रह है दस संवेदनशील, व्यंग्यात्मक, और गहराई से सोचने को मजबूर कर देने वाली कहानियों का, जो आम जीवन की असामान्य सच्चाइयों को उजागर करती हैं। यह पुस्तक उन अनुभवों की रेखाचित्र है जो हम सबने कभी न कभी जिये हैं — कभी इज्ज़त की दरारों में, कभी समाज की चालाकियों में, कभी नशे की गोद में तो कभी शादी के खाने की साजिशों में।
सामाजिक व्यवहार, पारिवारिक रिश्तों, आत्म-सम्मान, पाखंड, और वर्ग भेद पर तीखे मगर संवेदनशील तरीके से रोशनी डाली है। यहाँ हर कहानी मानवीय भावनाओं का एक नया रंग लेकर आती है — कभी मार्मिक, कभी तीखा, तो कभी हास्य से भरपूर।
प्रमुख कहानियाँ:
इज्ज़त – जब शर्म से ज्यादा जरूरी हो जाता है आत्म-सम्मान।
आमंत्रण – एक शादी का न्योता, जो रिश्तों की सच्चाई उधेड़ कर रख देता है।
चालाकी – बच्चों की दुनिया में भी ईगो और राजनीति कैसे पलती है।
उत्तेजना – एक साधारण लघुशंका किस तरह बड़ा सामाजिक व्यंग्य बन जाती है।
2 रुपये – जब भूख, स्वाभिमान और गलतफहमी की कीमत होती है बस दो रुपये।
पुस्तक क्यों पढ़ें:
हर कहानी में है एक मजबूत सामाजिक संदेश
आम घटनाओं को असाधारण दृष्टिकोण से देखने का नजरिया
सरल, संवादात्मक, और व्यंग्य से भरपूर भाषा
विचारों को झकझोरने वाली कहानियाँ जो पढ़ने के बाद भी आपके साथ रहती हैं
"भावनाओं की रासलीला" सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि हर उस भाव की यात्रा है, जिससे हम सब हर दिन गुजरते हैं — बिना इसे समझे या नाम दिए।